बड़े कोचिंग संस्थानों में एक-एक बैच में 500 से 1000 बच्चे बैठते हैं। वहाँ टीचर को यह भी नहीं पता होता कि आखिरी बेंच पर बैठे छात्र को समझ आ रहा है या नहीं।
जब तक आपका डाउट क्लियर नहीं होगा, हम आगे नहीं बढ़ेंगे, बड़े संस्थानों में आप सिर्फ एक 'रोल नंबर' बनकर रह जाते हैं, आप मेरे लिए एक ज़िम्मेदारी हैं।